Saturday, July 11, 2015

"चातुर्मास में करें प्राकृत भाषा का विकास"

सादर प्रकाशनार्थ
"चातुर्मास में करें प्राकृत भाषा का विकास"
विश्व के प्रायःसभी धर्म ग्रन्थ किसी न किसी भाषा में लिखे गए हैं | भगवान् महावीर की दिव्यध्वनि में जो ज्ञान प्रकट हुआ वह मूल रूप से प्राकृत भाषा में संकलित हैं जिन्हें प्राकृत जैन आगम कहते हैं |इन दिनों जैन समाज में प्रायः सभी जगह साधु/साध्वियां चातुर्मास स्थापित कर रहे हैं |चातुर्मास में प्रत्येक जगह विशेष धर्म आराधना की जाती है तथा लोगों में विशेष उत्साह रहता है |वर्तमान में यह देखा जा रहा है कि हमारे मूल आगमों की भाषा प्राकृत को लोग जानते भी नहीं हैं तथा इसका परिचय भी नहीं है |इसीलिए हम अपने शास्त्र पढ़ नहीं पाते हैं |यह हमारा दुर्भाग्य है |इस वर्ष चातुर्मास में सभी साधू श्रावक विद्वान् आदि निम्नलिखित प्रयास करके समाज में प्राकृत भाषा को पुनः जीवंत कर सकते हैं -
१. अपनी सभाओं में प्रत्येक कार्यक्रम के पहले एक मंगलाचरण प्राकृत गाथाओं का अवश्य करें अथवा करवाएं |तथा उससे पूर्व सभा में यह घोषणा करें कि अब प्राकृत भाषा में मंगलाचरण होगा |हो सके तो उसका अर्थ भी बताएं |
२. चातुर्मास में एक हफ्ते का प्राकृत शिक्षण शिविर भी अवश्य रखें |
३. सामायिक तथा प्रतिक्रमण पाठ मूल प्राकृत में ही कराएँ ,भले ही बाद में हिंदी में अर्थ समझा दें |
४. अपने कुछ व्याख्यान प्राकृत भाषा के ऊपर दें |
५. प्राकृत भाषा की प्रेरक शुद्ध गाथा /सूक्ति आदि अर्थ सहित फ्लेक्स आदि पर छपवा कर मंदिर,स्थानक,पंडाल आदि प्रमुख स्थानों पर लगवाएं |
६. किसी एक प्राकृत पाण्डुलिपि का संपादन करें या करवाएं तथा उसे प्रकाशित करें |
७. देश में कई संस्थान ,विश्वविद्यालय आदि प्राकृत के नियमित /पत्राचार पाठ्यक्रम चलाते हैं |समाज में कुछ प्रतिभाशाली लोगों को वे कोर्स करने को प्रेरित करें |
८. यदि आप प्रभावशाली हैं तो जहाँ आपका चातुर्मास है वहां के विश्वविद्यालय में जैन विद्या और प्राकृत विभाग /अकादमी/शोध संस्थान स्थापित करवाने का प्रयास करें ताकि चातुर्मास की स्मृति अमर हो और महान उपलब्धि मानी जाय |
९. बातचीत और भाषण ,प्रवचन में प्राकृत के कई तकनीकी शब्दावलियों का प्रयोग अवश्य करें जैसे “नमोस्तु”के स्थान पर “णमोत्थु” आदि का प्रयोग प्रारंभ करें |
१०. निमंत्रण पत्रिकाओं में एक प्राकृत गाथा अर्थ सहित अवश्य प्रकाशित करवाएं |
इस तरह के और भी कार्य किये जा सकते हैं |हो सकता हम सभी का एक छोटा सा प्रयास भी कोई बड़ा काम कर दे |
निवेदक–डॉ अनेकांत कुमार जैन,नई दिल्ली ,anekant76@gmail.com;
ph. 09711397716

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