Wednesday, February 11, 2015

सादरप्रकाशनार्थ ' आसमान पर कभी मत थूकना ,खुद के ही ऊपर गिरता है'

सादरप्रकाशनार्थ
                                  ' आसमान पर कभी मत थूकना ,खुद के ही ऊपर गिरता है'
-कुमार अनेकांत
मैं दिल्ली जनता की जनता हूँ मैंने अपना फैसला बता दिया |अब इस जीत से सभी गैर भाजपाई हार कर भी खुश हैं |दिक्कत यही है कि इसे भाजपा के विरोध का जनादेश समझा जा रहा है | वे खुश न हों |मेरा दर्द समझें |मुझे मोदी जी कल भी पसंद थे ...आज भी पसंद हैं |इसी तरह केजरीवाल भी कल भी पसंद थे आज भी पसंद हैं |हम क्या करें ?
हम किसी पार्टी के नहीं हैं |पार्टी के आप हैं |आपकी मजबूरी होती है कि मजबूरी में अपनी पार्टी के गलत इंसान को भी सही ठहराना |केजरीवाल बीजेपी से लड़ते तो उन्हें इतनी ही सीटें देते |मोदी आम आदमी पार्टी से लड़ते तो हम उन्हें उसी प्रकार चुनते | हम लोग मानते हैं कि कोई भी पार्टी गलत या सही नहीं होती |हमें व्यक्ति या नेता गलत या सही लगते हैं |
आप के साथ समस्या यह है कि आप हमें वेवकूफ समझते हो |आपने केजरीवाल पर आरोप लगाया कि सरकारी कार या बंगला नहीं लेंगे कह कर आते ही एक अदद कार और चार कमरे का फ्लैट क्यूँ ले लिया ?आपने समझा हम भड़क जायेंगे |हम भी जानते हैं कि उनका अभिप्राय सरकारी ऐय्याशी नहीं करने से था और उन्होंने ऐसा किया | पद यात्रा करके और झोपडी में रह कर सरकार चलाने को हम भी नहीं मानेंगे |आपके निर्थक आरोप हमें रास नहीं आये |
हम वादों के उपलक्षण समझते हैं |हम जानते हैं कि प्रेमिका से जब यह कहा जाता है कि मैं तुम्हें चाँद तारे ला कर दे सकता हूँ तब उसका अर्थ यही होता है कि मैं तुम्हें अन्य लोगों कि अपेक्षा बहुत अधिक चाहता हूँ और विवाह के बाद यदि वह उसे प्रेम पूर्वक किसी बीच पर ले जा कर भेलपुड़ी और गोल गप्पे खिलाने का भी समय निकाल ले तो पत्नी को वो चाँद तारों जैसा ही लगता है |पत्नी को आपकी नौकरी,व्यस्तता से शिकायत नहीं है वो जानती है कि ये नहीं करेंगे तो गृहस्थी नहीं चलेगी |लेकिन उसे तब अपनी अत्यधिक उपेक्षा बर्दाश्त नहीं होती जब आपको उसकी हफ्ते में एक बार भी याद नहीं आती |ऐसा ही हाल हमारा है ...लेकिन उससे कुछ ठीक क्यूँ कि हम पांच साल में अपने आका बदल सकते हैं |
आप इस जीत का यह अर्थ कदापि न लगायें कि हमारा भरोसा मोदी जी पर कम हो गया है |Modi PM ,Kejri CM का नारा हम बहुत पहले दे चुके थे | बस दोनों पार्टी को ये नारा आधा आधा ही रास आ रहा था तो इसमें हमारी कोई गलती नहीं | हम आप नहीं हो सकते और आप हम नहीं हो सकते |
प्रिय राष्ट्र सेवक राजनैतिक दलों से हमारा इतना ही कहना है कि हार या जीत सिद्धांतों के मापदंड तय करने का तराजू नहीं है ,बस एक अनुमान सा है जो आत्म मंथन को मजबूर करता है |लोकसभा में जब केजरीवाल हारे थे तब भी वे हमारी नजरों से नहीं हारे थे | प्रचार में शिष्टाचार हमेशा याद रखना |बुरे को बुरा कहोगे तो एक बार चल भी जायेगा लेकिन अच्छे को बुरा कहोगे तो नहीं चलेगा | आसमान की तरफ मुंह करके कभी मत थूकना ,वो खुद के ऊपर गिरता है |यही हाल मोदी विरोधियों का भी हुआ था और अब केजरीवाल विरोधियों का भी हुआ | हम ही राष्ट्रवादी हैं ,हम ही सेवक हैं ,हम ही संप्रदाय निरपेक्ष हैं ,हम ही ईमानदार है ,हम ही विकास कर सकते हैं ................ऐसा मात्र कहने और पोस्टर छापने से कुछ नहीं होगा |ऐसा हमें लगना भी चाहिए ..और लगेगा तभी जब आप कुछ ऐसा करोगा और यदि कुछ कम भी कर सके ,मगर ऐसा पवित्र भाव भी सच्चे मन से रखोगे तो ..तो हमें वैसा लगेगा और हम वैसा मानेंगे |आगे से ध्यान रखना हम किसी पार्टी के नहीं हैं हम उसी के हैं जो दिल से हमारा है ,राष्ट्र का है |

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