Saturday, July 5, 2014

‘दार्शनिक समन्वय की जैन दृष्टि’ कृति को महावीर पुरस्कार-२०१३



‘दार्शनिक समन्वय की जैन दृष्टि’ कृति को महावीर पुरस्कार-२०१३ 
‘महर्षि वादरायण व्यास’युवा राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित विद्वान डॉ अनेकान्त कुमार जैन ,नई दिल्ली की महत्वपूर्ण शोध कृति ‘दार्शनिक समन्वय की जैन दृष्टि : नयवाद’ को जैन विद्या संस्थान ,जयपुर द्वारा प्रदान किये जाने वाले लब्ध प्रतिष्ठित “महावीर पुरस्कार-२०१३”के लिए वहाँ की विशेषज्ञ समिति ने चयनित किया है |यह कृति डॉ अनेकान्त के शोधप्रबंध का प्रकाशित संस्करण है जिसे उन्होंने प्रो.दयानंद भार्गव जी के निर्देशन में जैन विश्व भारती संस्थान ,लाडनूं में रह कर पूर्ण किया था |उक्त ग्रन्थ का गरिमापूर्ण प्रकाशन वैशाली स्थित प्राकृत ,जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान ने किया है |यह कृति लगभग २३० पृष्ठों की है तथा आठ अध्यायों में विभाजित है |इस कृति की विशेषता यह है कि लेखक ने जैन दर्शन के नयवाद की शास्त्रीय मीमांसा की है और इस सिद्धांत के ऐतिहासिक विकास को दर्शाया है |मुख्यरूप से सात नयों की तुलना विभिन्न भारतीय दर्शनों के साथ प्रामाणिक रूप से करके नयों की व्यापकता को दार्शनिक दृष्टि से खोजने का प्रयास किया है | ज्ञातव्य है कि डॉ.जैन प्राच्य विद्या के प्रख्यात मनीषी प्रो.डॉ.फूलचंद जैन प्रेमी जी तथा ब्राह्मीलिपि लिपि की विशेषज्ञ विदुषी श्रीमती डॉ मुन्नी पुष्पा जैन के ज्येष्ठ सुपुत्र हैं |
डॉ अनेकान्त कुमार जैन वर्तमान में श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (मानित विश्वविद्यालय),नई दिल्ली में जैनदर्शन विभाग में सहायक आचार्य के रूप में कार्यरत हैं तथा प्राकृत / संस्कृत के मूल आगम ग्रंथों का अध्यापन कार्य कर रहे हैं | डॉ जैन के अभी तक दश ग्रंथों का प्रकाशन हो चुका है तथा लगभग पचास शोध लेख शोध पत्रिकाओं में और लगभग डेढ़ सौ लेख दैनिक जागरण आदि विभिन्न राष्ट्रीय समाचार पत्रों तथा अनेक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं | आधुनिक सन्दर्भों में लिखी गयी आपकी पुस्तक ‘अहिंसा दर्शन:एक अनुचिंतन’ तथा पांच संस्करणों और लगभग २०,००० प्रतियों में जन जन तक पहुँच चुकी आपकी कृति जैन धर्म :एक झलक’ काफी प्रसिद्ध है | आपने अभी तक लगभग पचास राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रिय सेमिनारो में भाग लेकर प्राकृत और जैन विद्या के अनेक अनुसंधान प्रस्तुत किये हैं |
आपके इन्हीं कार्यों का मूल्यांकन करते हुए देश में विद्वानों की सबसे पुरानी संस्था अखिलभारतवर्षीय शास्त्री परिषद ने जून २०१४ के प्रारंभिक सप्ताह में आचार्य ज्ञानसागर महाराज जी के सानिध्य में परिषद के अध्यक्ष डॉ श्रेयांश जैन ,मंत्री –पं.जयनिशांत एवं संयोजक डॉ कपूरचंद जैन जी ने  २०१४ का श्रेष्ठी श्री मिश्रीलाल बैनाड़ा स्मृति  शास्त्रिपरिषद पुरस्कार प्रदान कर के सम्मानित किया है |
आपने परम्परागत रूप से जो आगमों का अभ्यास किया है उसे पिछले १८ वर्षों से पूरे देश में जाकर दशलक्षण आदि पर्वों पर अपनी प्रभावक और रोचक व्याख्यान शैली के माध्यम से जैन तत्त्व ज्ञान को आबाल-गोपाल तक पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रहे हैं | इन अवसरों में समाज द्वारा प्रदत्त अभिनन्दन पत्र तथा ‘जैन विद्या भास्कर’,’युवा वाचस्पति’ आदि उपाधियों से आपको नवाजा जा चुका है |उत्कृष्ट शोध कार्य हेतु आपको कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ ,इंदौर द्वारा  अर्हत वचन पुरस्कार तथा कुंदकुंद ज्ञानपीठ पुरूस्कार भी इसके पूर्व दिए जा चुके हैं |

No comments:

Post a Comment