Friday, March 30, 2012

भ्रष्टाचार के विरोध में सादगी और संतोष

सादगी और संतोष के बिना ईमानदारी कठिन है

अनेकांत कुमार जैन

भ्रष्टाचार के विरोध में चारो तरफ आंदोलन हो रहे हैं.जो स्वयं भ्रष्ट हैं वे भी इसका विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं कि उन्हें भी एक अदद ईमानदार दोस्त तो चाहिए ही. हम कानून बना सकते हैं ,बनना भी चाहिए.लेकिन मैंने देखा है कि जो स्वयं ईमानदार नहीं है उसे दुनिया की कोई भी ताकत ईमानदार नहीं बना सकती.कानून का डर भी सीधे लोगों को ही होता है.दुष्ट प्रकृति के लोग फिर भी नहीं सुधरते. स्वाभाविक ईमानदारी के लिए हमें एक बार फिर उन्हीं पुराने मूल्यों कि तरफ देखना ही पड़ेगा जिन्हें हमनें पुरानी और दकियानूसी बातें कहा कर बहुत पीछे छोड़ दिया हैं . हम केवल दो बातों को लें- सादगी और संतोष. सादगी का मूल्य हम भूल चुके हैं.आज एक क्लर्क भी महंगे कपड़े,महँगी गाड़ी,ऊँची ईमारत,हवाई यात्रा आदि आदि की चाहत तो रखता ही है, उसके लिए प्रयास भी करता है.इसके लायक वेतन तो है नहीं तो बेईमानी करता है.सादगी का सिद्धांत तो यह है कि करोड़पति भी हो तो भी जीवन सादा हो. उसी में सुख माने. संतोष भी नहीं रखेंगे तो इच्छाएं तो अनंत होती हैं.सादगी रहेगी तो जरूरतें कम से कम होंगी,संतोष रखेंगे तो इच्छाएं परेशां नहीं करेंगी. पहले बाजार आवश्यकताएं पूरी करने का ही काम करता था आज वो जबरजस्ती आवश्यकताएं बढ़ाने पर उतारू है. हमें जिस चीज कि जरूरत ही नहीं है उसे भी हमारी जरूरत बनाने की कोशिश वो करता है.उसका लक्ष्य देश का या हमारा विकास करना नहीं है बल्कि सिर्फ अपना माल बेचना है.हम उसके मायावी जाल में फँस जाते हैं और इच्छाएं पूरी करने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं.हम दूसरों को दोष क्यों दें ?हम भी कम नहीं हैं.आज हमने स्वयं ही इतने ताने बने बुन रखे हैं कि लालच के कारण हमने अपने सारे मूल्यों की बलि चढ़ा दी है.अन्ना जी सादगी और संतोष के साथ आसानी से रह सकते है.उसमें कोई विशेष तपस्या नहीं है.परिवार के साथ सारी जिम्मेदारिओं को निभाते हुए सादगी और संतोष के साथ रह पाना आज के युग में ज्यादा बड़ी साधना है.कोई आज माने , कल माने ,चाहे अनन्त काल बाद माने ,मानना यही पड़ेगा कि सच्चे सुखी जीवन का एक ही उपाय है और वो है सादगी और संतोष,जिसके बिना ईमानदारी बहुत मुश्किल है.

डॉ.अनेकांत कुमार जैन ,

स.आचार्य- जैन दर्शन विभाग,

श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ ,

(मानव संसाधन विकास मंत्रालयाधीन मानितविश्वविद्यालय),

क़ुतुबसंस्थानिकक्षेत्र,नईदिल्ली-११००१६,फ़ोन ९७११३९७७१६

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