वर्णी जयंती पर विशेष *जैनदर्शन विभागों/ महाविद्यालयों के गंभीर शास्त्री विद्वानों के लिए आवश्यक पंचसूत्रीय मार्गदर्शन* पूज्य क्षुल्लक गणेश प्रसाद वर्णी जी ने अपने संपूर्ण संघर्ष पूर्ण जीवन काल में एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक कार्य किया था और वह था जैनदर्शन तत्वज्ञान संस्कृत भाषा प्राकृत भाषा के ज्ञान और प्रशिक्षण के लिए अन्यान्य संस्थाओं की स्थापना । उनमें से अधिकांश संस्थाएं सौ वर्ष या उससे अधिक समय की भी हो गई हैं । उनके इस आंदोलन के फल स्वरूप उनकी ही स्थापित संस्थाओं के स्नातकों ने और भी अनेक नई संस्थाएं इसी उद्देश्य को लेकर स्थापित करवाई हैं जिनसे वर्तमान की नई पीढ़ी भी शास्त्री / आचार्य / Phd जैसे कोर्स करके विद्वत्ता के क्षेत्र में कार्य कर रहीं हैं । उन जैन महाविद्यालयों में अध्ययनरत उन शास्त्री विद्वानों एवं विदुषियों के लिए जिन्होंने परिश्रम पूर्वक जैनाचार्यों द्वारा लगभग सभी मूलभूत प्राकृत- संस्कृत ग्रंथों का भली भांति अध्ययन करके उनमें प्रवीणता प्राप्त कर ली है और जो आजीवन जैनविद्या, जैनदर्शन एवं प्राकृत आगमों के अध्ययन-अध्यापन, अनुसंधान और संरक्षण के क्षेत्र में समर...