जैन परंपरा के तीर्थंकर ऋषभदेव का उल्लेख वेदों और वैदिक पुराणों में भी किया गया है । जैन विद्वानों ने जैन परंपरा की प्राचीनता इनके सामने सिद्ध करने के लिए इनके संदर्भ प्रचुर मात्रा में दिए ,अनेक ग्रंथ लिखे ,शोध पत्र लिखे । ये जो कार्य हुआ ,वह निश्चित ही प्रशंसनीय है किंतु उसमें आज भी कई लेखक और पोस्टर निर्माता तक जैन आगम के संदर्भों को उल्लिखित या तो करते ही नहीं है या बहुत कम करते हैं । अभी ऋषभदेव जयंती पर भी जैन मीडिया प्लेटफॉर्म से कुछ वीडियो और रील फैलाए गए जिसमें सारे इंटरव्यू जैनेतर लोगों के थे ,मात्र जैनेतर प्रमाणों से भरपूर उस वीडियो को मैंने सराहना के साथ साथ सावधान भी किया था । उसमें एक दो जैन मुनियों और विद्वानों के वक्तव्य और जैन आगमों के उद्धरण भी होने चाहिए थे । दिल्ली में एक चातुर्मास के भव्य कार्यक्रमों में जिसमें बड़े बड़े नेता मंत्री आते रहे ,उन्हें भरत से भारत का एक बड़ा एलबम इसलिए भेंट किया गया ताकि वे अपने मंत्रालयों कार्यालयों घरों में उसे टांगें , उसमें भी जो श्लोक लिखा था वह श्रीमद्भागवत का ही था , किसी भी जैन शास्त्रों का इससे संबंधित कोई ...
रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाए प्रो अनेकांत कुमार जैन ,नई दिल्ली आजकल विचित्र किस्म का अवसाद चल रहा है । लोग आपसे बहुत तीव्रता से जुड़ते हैं जो अक्सर असहज होता है ,उन्हें आप रोक नहीं पाते ,कारण भी जान नहीं पाते,फिर यह सिलसिला कुछ वर्षों तक चलता है , उन रिश्तों में आप भी सामान्य और सहज नहीं रह पाते हैं ,थोड़ा बहुत जुड़ ही जाते हैं । फिर कुछ वर्षों में एक दिन अचानक उन्हीं लोगों का न जाने क्यों रुख बदल जाता है । जो इतने प्रिय हो रहे थे अचानक वे ही बहुत औपचारिक हो जाते हैं । पहले जैसे नहीं रह जाते ,बदल जाते हैं । और पूछने पर भी उसका कारण नहीं बताते , कोई भूल या गलत फहमी हो गई हो तो उसे तभी दूर किया जा सकता है जब उसकी चर्चा की जाय और उसे रेखांकित किया जाय । मिलते पहले जैसे ही हैं ,अभिवादन आदि भी करते हैं , कुछ नहीं, बस सब कुछ पहले जैसा नहीं रह जाता । इसी बीच पता चलता है एक बिचौलिया मध्य में आ गया , वह दोनों से जुड़ता है,और उन दोनों के मन में एक दूसरे के विरुद्ध एक नहीं हजार गलत फहमियां खड़ी करता है । और हम मान लेते हैं ,आपस में उसका स्पष्टी...