AI के दौर में दिगम्बर जैन साधना और डिजिटल सेंसरशिप प्रो अनेकांत कुमार जैन ,नई दिल्ली अभी हाल ही में महावीर जयंती के अवसर पर मीडिया और सरकारी विज्ञापनों में वस्त्र (विशेष कर धोती)सहित भगवान् महावीर का चित्र प्रकाशित कर बधाइयां दी गई । इसके साथ साथ अजैन तो छोड़िए कई जैन बंधुओं ने भी महावीर की जगह बुद्ध की फोटो लगा कर महावीर जयंती की बधाइयां दीं ।अपने प्रचार की भूख में अज्ञानता और प्रमाद इस कदर हावी है कि क्या लिख रहे हैं क्या छाप रहे हैं इसका भी होश नहीं है । सांध्य महालक्ष्मी अखबार ने पहली बार एक लेख में AI और प्राचीन दिगम्बर जैन परंपरा से जुड़ी इन्हीं समस्याओं से संबंधित एक लेख पढ़ कर प्रसन्नता हुई कि वे एक पत्रकारिता का कर्त्तव्य भी सही तरीके से निभा रहे हैं। वास्तविकता यह है कि आज दुनिया तेजी से Artificial Intelligence और सोशल मीडिया के युग में प्रवेश कर चुकी है। इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने जानकारी को वैश्विक स्तर पर फैलाने का अभूतपूर्व माध्यम प्रदान किया है। लेकिन तकनीकी प्रगति के साथ-साथ कुछ ऐसी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं, जिनका संबंध सांस्कृतिक और...
भगवान् महावीर का संदेश : “जानो और जाने दो” प्रो अनेकांत कुमार जैन भगवान् महावीर का संदेश “जियो और जीने दो” विश्वभर में अहिंसा और सह-अस्तित्व के सिद्धांत के रूप में प्रसिद्ध हुआ। किंतु उनके उपदेशों में एक और अत्यंत गहन आध्यात्मिक सूत्र मिलता है—“जानो और जाने दो”। यह संदेश मनुष्य को जीवन के प्रति सही दृष्टि देता है और आत्मा की वास्तविक प्रकृति को समझने का मार्ग दिखाता है। जैन दर्शन के अनुसार संसार में अनंत प्रकार के पदार्थ, परिस्थितियाँ और अनुभव उपस्थित हैं। मनुष्य का स्वभाव प्रायः यह होता है कि वह इन पदार्थों को केवल जानता ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़ भी जाता है। यही जुड़ाव या आसक्ति दुःख और बंधन का कारण बनती है। भगवान् महावीर ने इसलिए यह स्पष्ट किया कि संसार के पदार्थों के प्रति केवल ज्ञान होना चाहिए, आसक्ति नहीं। अर्थात् उन्हें जानो, समझो, परंतु उनसे अपने मन को बाँधो मत; उन्हें जाने दो। “जानो” का अर्थ है—वस्तुओं, परिस्थितियों और भावों के वास्तविक स्वरूप को समझना। जीवन में अच्छे और बुरे, दोनों प्रकार के अनुभव आते हैं। जैन दर्शन यह नहीं कहता कि उनसे आँखें बंद कर ली जाएँ; बल्...