रिसर्च एक कला है जिसे सभी नहीं कर सकते
प्रो.अनेकांत कुमार जैन
शिक्षा में जिस चीज को अनिवार्य किया जाता है एक दिन उसका ही बाजार बन जाता है फिर चाहे शोध पत्र का प्रकाशन हो किसी ग्रंथ का प्रकाशन हो या फिर शोध प्रबंध /पी एचडी हो !
जैसे हर कोई बांसुरी नहीं बजा सकता, तबला नहीं बजा सकता कत्थक नहीं कर सकता , कविता नहीं लिख सकता, अभिनय नहीं कर सकता ,क्यों कि प्रत्येक व्यक्ति की फितरत अलग-अलग होती है जरूरी नहीं कि शिक्षा से जुड़े सभी लोग शोध कर ही लें या उनकी अभिरुचि शोध में हो ही ,क्योंकि शोध एक कला है उसके लिए एक जज्बा एक इच्छा और कुछ कर गुजरने की तमन्ना बहुत आवश्यक होती है तभी समर्पण भी जीवन में आता है ।
इनके बिना जो भी शोध होता है वह शोध नहीं होता है वह संकलन होता है वहां शोध की गुणवत्ता का दूर-दूर तक नामो निशान तक नहीं होता ।
जब तक शोध एक कला की तरह है तब तक उसकी गरिमा बरकरार रहती है लेकिन जब उसे अनिवार्य तत्व बना दिया जाता है अर्थात बिना उसके नियुक्ति नहीं प्रमोशन नहीं तब वह मजबूरी भी बन जाता है और लोग जिन्हें शोध में रुचि नहीं है समर्पण नहीं है वह मजबूरी में शोध करते हैं उसे छपवाते हैं चाहे वह पैसे देकर ही क्यों ना हो क्योंकि नियुक्ति सभी चाहते हैं प्रमोशन सभी चाहते हैं और इस कारण कोई अपनी उन्नति और अपना उत्कर्ष चाहे वह दिखावे का ही क्यों ना हो रोक नहीं जा सकता ।
विज्ञान के क्षेत्र में भी अनुसंधान से ज्यादा महत्व प्रौद्योगिकी को मिल रहा है । MA की तरह MSC करने वालों की संख्या भी न्यून होती जा रही है । बच्चा इंजीनियर या डॉक्टर बनना चाहता है ,वैज्ञानिक नहीं ।
इसलिए उच्च शिक्षा जगत में इस बात को बहुत गंभीरता से समझना होगा की शोध कार्य अभिरुचि से जनित हो जो वास्तव में शोध के योग्य हैं उन्हें ही शोध कार्य करने दिया जाए वर्तमान में कई तरह की विसंगतियां हमारे सामने देखने में आती हैं जैसे यूजीसी की नेट परीक्षा जिसमें पहले सब्जेक्टिव प्रश्न भी होते थे उनके बहुत संतुलित और शोध परक उत्तर विद्यार्थी को लिखने होते थे जिससे यह तय होता था कि यह विद्यार्थी शोध की परंपरा को समझता है या नहीं ? इसे लिखना आता है या नहीं ? इसकी प्रस्तुति किस स्तर की है ? इसकी जांच हो सकती थी ,उसका मूल्यांकन हो सकता था।
लेकिन अभी जो स्थितियां देखने में आ रही हैं वह यह है की पी एचडी में प्रवेश की अनिवार्य योग्यता यूजीसी की नेट परीक्षा को बनाया गया है जिसमें विकल्पात्मक प्रश्न ही होते हैं ,चार में से एक को टिक करना होता है अब कोई यह बताएं की मात्रा टिक लगाकर उत्तीर्ण हुए किसी जेआरएफ या नेट उत्तीर्ण व्यक्ति को जिसे एक लेख लिखने की भी समझ नहीं है ,वह जेआरएफ के आधार पर एचडी में प्रवेश ले लेता है और उसे ढाई 300 पेज का एक शोध कार्य लिखना होता है तब वह क्या करेगा ? निश्चित रूप से बाजार से लिखवा आएगा ।
5/4/2026
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