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जैन श्रमण संस्कृति का वास्तविक प्रतीक कौन ? भरत या बाहुबली ?

जैन परंपरा के तीर्थंकर ऋषभदेव का उल्लेख वेदों और वैदिक पुराणों में भी किया गया है । जैन विद्वानों ने जैन परंपरा की प्राचीनता इनके सामने सिद्ध करने के लिए इनके संदर्भ प्रचुर मात्रा में दिए ,अनेक ग्रंथ लिखे ,शोध पत्र लिखे । ये जो कार्य हुआ ,वह निश्चित ही प्रशंसनीय है किंतु  उसमें आज भी कई लेखक और पोस्टर निर्माता तक जैन आगम के संदर्भों को उल्लिखित या तो करते ही नहीं है या बहुत कम करते हैं । अभी ऋषभदेव जयंती पर भी जैन मीडिया प्लेटफॉर्म से कुछ वीडियो और रील फैलाए गए जिसमें सारे इंटरव्यू जैनेतर लोगों के थे ,मात्र जैनेतर प्रमाणों से भरपूर उस वीडियो को मैंने सराहना के साथ साथ सावधान भी किया था । उसमें एक दो जैन मुनियों और विद्वानों के वक्तव्य और जैन आगमों  के उद्धरण भी होने चाहिए थे ।  दिल्ली में एक चातुर्मास के  भव्य कार्यक्रमों में जिसमें बड़े बड़े नेता मंत्री आते रहे ,उन्हें भरत से भारत का एक बड़ा एलबम इसलिए भेंट किया गया ताकि वे अपने मंत्रालयों कार्यालयों घरों में उसे टांगें , उसमें भी जो श्लोक लिखा था वह श्रीमद्भागवत का ही था , किसी भी जैन शास्त्रों का इससे संबंधित कोई ...