*वर्तमान का टीचर डरते हुए देता है निडरता का लेक्चर* बहुत हुई शिक्षक दिवस की बधाइयां । आज शिक्षक दिवस पर हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि डरता हुआ शिक्षक निडर पीढ़ी नहीं बना सकता और भय के अधीन शिक्षा स्वतंत्र समाज का निर्माण नहीं कर सकती। विचार कीजिए कि जो शिक्षक अपनी आजीविका की सुरक्षा के कारण सच बोलने से डरता है, वह विद्यार्थियों को सत्य के लिए खड़े होने का साहस कितने समय तक सिखा पाएगा? प्रशासन को भी सिर्फ शिक्षा की व्यवस्था करना चाहिए, कभी भी शिक्षक / विचारक/ विद्वान् की चेतना को नियंत्रित नहीं करना चाहिए। देश में यह तय करना चाहिए कि शिक्षक केवल आदेशों का पालन करने वाला कर्मचारी बनकर न रहे । वह विचारक बने, प्रश्नकर्ता बने और समाज के विवेक का प्रतिनिधि बने। यदि शिक्षक /विचारक / विद्वान् भी किसी आग्रह , विचारधारा या शक्ति के नियंत्रण में रहेगा तो समाज में कौन सा वर्ग बचेगा जो सही गलत का भेद दिखलायेगा ? सही दिशा बतलाएगा ? शिक्षक कमजोर होगा तो समाज कमजोर होगा, समाज कमजोर होगा तो राष्ट्र कमजोर होगा । आज स्थिति यह है कि शिक्षक समाज में वह वैचारिक ऊर्जा और परि...