शुभ चिंतकों की प्रतिभा
अम्हेहि ण भासंति वि, अम्हाणं सव्वजणेहि भासंति ।
ण पेच्छिउं इच्छंति वि, दिट्ठी अम्हेसु णिवेसिया ॥
भावार्थ
(हमें न चाहने वाले) हमसे बात तक नहीं करते, पर हमारे बारे में सभी से बात करते हैं। वे हमें देखना भी नहीं चाहते, फिर भी उनकी दृष्टि सदा हम पर ही लगी रहती है (यही उनकी सबसे बड़ी प्रतिभा है ) ।
प्रो अनेकांत कुमार जैन ,नई दिल्ली
१५/०९/२६
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